Car कंपनियाँ आपको माइलेज में कैसे बेवकूफ बनाती हैं? – 2026 Reality Check

भूमिका: माइलेज का वादा और सड़कों की सच्चाई

भारत में कार खरीदते समय सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल होता है –
“कितना माइलेज देती है?”

शोरूम में जवाब हमेशा confident होता है।
“Sir, 20–22 kmpl आराम से मिल जाएगा।”

लेकिन कुछ महीनों बाद वही कार शहर में 12–14 kmpl दिखाने लगती है।
यहीं से शक शुरू होता है।

तो सवाल यह नहीं है कि आपकी ड्राइविंग खराब है या नहीं,
सवाल यह है कि क्या आपको शुरुआत में पूरी सच्चाई बताई गई थी?

2026 में जब ईंधन महंगा है और कार की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं,
तो माइलेज की सच्चाई जानना और भी ज़रूरी हो जाता है।

ARAI माइलेज: कागज़ पर शानदार, सड़क पर कमजोर

भारत में कार कंपनियाँ जो ऑफिशियल माइलेज बताती हैं,
वह Automotive Research Association of India (ARAI) के टेस्ट पर आधारित होता है।

ARAI टेस्ट कैसे होता है?

  • टेस्ट लैब के अंदर किया जाता है
  • AC बंद रहता है
  • Traffic नहीं होता
  • Smooth और controlled speed रखी जाती है
  • कार में कोई luggage या extra load नहीं होता

इसका मतलब साफ है —
यह टेस्ट real Indian driving condition को represent नहीं करता।कंपनी के लिए यह नंबर marketing tool होता है,
लेकिन ग्राहक इसे real performance मान लेता है।

शोरूम में बताई जाने वाली अधूरी सच्चाई

Sales executive आमतौर पर झूठ नहीं बोलता,
लेकिन वह हर जरूरी बात भी नहीं बताता।

आम बातें जो आप सुनते हैं:

  • Highway पर mileage और बढ़ जाता है
  • AC से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता
  • Normal driving में claimed mileage मिल जाता है

जो नहीं बताया जाता:

  • Indian cities में traffic stop-go वाला होता है
  • AC लगभग पूरे साल चलता है
  • Short distance drives में engine efficient नहीं होता

नतीजा यह निकलता है कि शोरूम का माइलेज
और रोज़मर्रा का माइलेज — दोनों अलग-अलग दुनिया बन जाते हैं।

City बनाम Highway: माइलेज का सबसे बड़ा फर्क

Highway driving:

  • Constant speed
  • Gear changes कम
  • Engine optimal RPM पर

City driving:

  • बार-बार brake और acceleration
  • Low gear usage
  • Signals और traffic jams

यही वजह है कि
जो कार highway पर 20 kmpl देती है,
वही city में 12–14 kmpl पर आ जाती है।

लेकिन विज्ञापन हमेशा highway-like आंकड़े दिखाते हैं।

Car का वजन और फीचर्स: माइलेज का छुपा हुआ दुश्मन

आज की कारें पहले से ज्यादा safe और feature-rich हो गई हैं।
लेकिन हर extra feature माइलेज पर असर डालता है।

माइलेज घटाने वाले factors:

  • Heavy body structure
  • Bigger alloy wheels
  • Sunroof
  • Extra safety equipment

2026 में safety norms और सख्त हो चुके हैं,
इसलिए mileage numbers अपने आप कम होंगे,
भले ही engine वही क्यों न हो।

Driving style: कंपनी इस पर ज़ोर क्यों नहीं देती?

सच्चाई यह है कि माइलेज का बड़ा हिस्सा driver के हाथ में होता है।

गलत driving habits:

  • तेज acceleration
  • High RPM पर driving
  • Clutch riding
  • Traffic में engine idle रखना

कंपनियाँ इन बातों को highlight नहीं करतीं,
क्योंकि इससे marketing number कमजोर पड़ जाता है।

Electric और Hybrid Cars में भी माइलेज का भ्रम

Electric और Hybrid cars को अक्सर zero-expense solution की तरह पेश किया जाता है।

Electric Cars:

  • Claimed range ज्यादा होती है
  • Real usage में AC, traffic और load से range 25–30% कम हो जाती है

Hybrid Cars:

  • City में battery help करती है
  • Highway पर petrol usage बढ़ जाता है

यहाँ भी कंपनियाँ ideal condition दिखाती हैं,
daily usage नहीं।

माइलेज से जुड़े आम भ्रम

  • Manual car हमेशा ज्यादा mileage देती है
  • Diesel car हमेशा सस्ती पड़ती है
  • Bigger engine मतलब कम mileage

2026 में engine technology काफी advanced है,
लेकिन marketing आज भी पुराने डर पर खेलती है।

Smart buyer बनने के practical तरीके

अगर आप माइलेज के नाम पर नुकसान नहीं चाहते, तो:

Car खरीदते समय:

  • Owner reviews ज़रूर देखें
  • City mileage search करें
  • Same engine की different body cars compare करें

Driving में:

  • Smooth acceleration रखें
  • सही tyre pressure maintain करें
  • Unnecessary idling से बचें

Expectation clear रखें:

Claimed mileage से 20–30% कम मानकर चलें

2026 Reality Check: पूरी गलती कंपनी की नहीं

कंपनियाँ ideal numbers दिखाती हैं
और हम उन्हें absolute truth मान लेते हैं।

माइलेज कोई fixed figure नहीं है,
यह driver, road और traffic पर depend करता है।

निष्कर्ष: माइलेज को समझदारी से देखें

अगर आप माइलेज को भावनाओं से नहीं,
समझदारी से देखेंगे,
तो गलत decision से बच सकते हैं।Car खरीदते समय marketing से थोड़ा दूरी रखें,
real usage को समझें,
और तभी आपकी car सच में value for money बनेगी।

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